हनुमान

  • Updated: Aug 06 2023 07:04 PM
हनुमान

हनुमान हिन्दू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं | इन्हें हनुमत, आंजनेय, मारुती, बजरंगबली, केसरी नंदन, पवनसुत आदि नामों से भी पूजा जाता है |

जन्म

हनुमान जी का जन्म कपिस्थल में हुआ था जो वर्तमान में हरियाणा प्रदेश में कैथल के नाम से जाना जाता है | इनके पिता केसरी जी थे जो वानरों के राजा थे और माता का नाम अंजनी था | हनुमान जी को पवन पुत्र भी कहा जाता है | जैसा की हनुमान चालीसा में वर्णित है "शंकर स्वयं केसरी नंदन" अर्थात हनुमान जी शिव के अवतार हैं | हनुमान जी का शरीर वज्र के सामान है इसलिए बजरंगबली भी कहते हैं |

हनुमान जी के जन्म से संभावित अलग अलग कथाओं का पुराणों में इस प्रकार वर्णन मिलता है : माता अंजनी का जन्म वानर भगवान श्री विराज के घर हुआ और समय आने पर उनका विवाह वानरराज केसरी से हुआ | जब अंजना माता एक दिन पुत्र प्राप्ति के लिए ध्यान मग्न थी तब पवन देव ने भगवान महादेव के तेज (वीर्यंश) को कर्णमार्ग द्वारा उनके गर्भ में स्थापित कर दिया | भगवान महादेव के तेज विष्णु भगवान के मोहिनी रूप पर मोहित होने के कारण स्खलित हुआ था |एक अन्य कथा अनुसार केसरी जी ने ऋषियों और देवताओं से वरदान माँगा था के उनका पुत्र पवन के समान तेज हो | तब पवन देव ने स्वयं ये वरदान दिया था | इस कारण उन्हें "अंजनी पुत्र पवनसुत नामा" कह कर पूजा जाता है | एक कथा और है जिसका वर्णन  आदि रामायण में मिलता है - जब राजा दसरथ ने पुत्र प्राप्ति के यज्ञ किया था और अग्नि देव ने पुत्र प्राप्ति के खीर दी थी जिसको तीन हिस्सों में विभाजित किया गया और तीन रानियों (कौशल्या, कैकई और सुमित्रा) को प्रसाद स्वरुप दी थी तो माता सुमित्रा के भाग की खीर एक गरुड़ आसमान में लेकर उड़ गया और उसने उस हिस्से को माता अंजनी की गोद में डाल दिया जब माता अंजनी भी पुत्र प्राप्ति के लिए तप कर रही थीं | माता अंजनी ने उस प्रसाद को ग्रहण किया और तत्पश्चात हनुमान जी का जन्म हुआ |

हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जयंती का उत्सव मनाया जाता है |

इसी प्रकार हनुमान जी के जन्म स्थान से संबंधित स्थान के भी अलग अलग मत हैं |

1. एक मत हरियाणा में कैथल जिले में |

2. दूसरा मत है के कर्नाटक के हंपी में ऋष्यमूक के राम मंदिर के पास मतंग पर्वत पे मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमान जी का जन्म हुआ था।

3. तीसरे मतानुसार गुजरात के डांग जिले के आदिवासियों की मान्यता है कि यहां अंजना पर्वत के अंजनी गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था।

4. एक और मतानुसार झारखंड के गुमला जिले के आंजन गांव में हनुमान जी का जन्म हुआ था।

हनुमान नामकरण

हनुमान जी का बाल्यकाल से नाम हनुमान नहीं था | उनका नाम मारुती था और हनुमान नाम रखने के पीछे एक बड़ी ही रोचक कथा है | ये तो सभी जानते हैं के शिवांश होने के कारण मारुती बचपन अतुलित बल के स्वामी थे | पवन पुत्र होने के कारण वो वायु के समान उड़ कर कहीं भी जा सकते थे | एक बार बचपन में मारुती को बहुत ज्यादा भूख लग रही थी तो उन्होंने सूर्य को आसमान में देख कर उसे आम का फल समझ लिया और उसे खाने के लिए सूर्य की और उड़ान भरने लगे | वो जैसे जैसे सूर्य के नजदीक जाने लगे वैसे ही अपना आकार भड़ाने लगे | अंततः उन्होंने सूर्य  को अपने मुँह में रख ही लिया | जिससे सृष्टि में अंधकार छा गया | सृष्टि  से मुक्ति दिलाने हेतु इंद्र देव ने मारुती पर अपने वज्र से प्रहार किया जो मारुती की ठुड्डी पर लगा | वज्र के प्रहार से सूर्य तो बाहर आ गया परन्तु मारुती मूर्छित होकर पृथ्वी पर गिरने लगे | मारुती को पवन देव ने अपनी गोद में ले लिया और क्रोधित होकर एक गुफा में चले गए | पवन देव के क्रोध के कारण सृष्टि में वायु का संचार रुक गया और चरों और त्रासदी होने लगी | तब सभी देवताओं करने पर पवन देव मारुती को लेकर गुफा से बाहर आये | तब मारुती की मूर्छा समाप्त होने पर देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान और शक्तियां दी और उनकी हनु (ठुड्डी को संस्कृत में हनु कहते हैं) पर प्रहार होने के कारण उनका नाम हनुमान पड़ा |

हनुमान और सुग्रीव की मित्रता

अपने भाई बलि के डर से और उससे बचने के लिए सुग्रीव ने ऋष्यमूक पर्वत पर शरण ली और वहीँ पर केसरी जी ने अपने पुत्र हनुमान को सुग्रीव की सेवा में छोड़ने के लिए कहा तो सुग्रीव हर्षित हो उठा और उसने सहर्ष हनुमान को अपने साथ मित्र रूप में रखने का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया ।

हनुमान जी का शक्तियों को भूलना

हनुमान बचपन में बहुत ज्यादा शरारती थे और भृगुवंश ऋषियों को बहुत ज्यादा तंग किया करते थे | एक बार ऋषियों ने क्रोध में आकर हनुमान को श्राप दे दिया के वो अपनी शक्तियों को सदा के लिए भूल जाये | परन्तु ऋषियों ने नरम स्वभाव के चलते ये छूट भी दी के जब कोई उन्हें उनकी शक्तियों को याद दिलाएगा तब उन्हें वो वापिस पा सकेंगे | जैसा की रामायण के सुन्दरकाण्ड में वर्णित है जामवंत के याद दिलाने पर ही हनुमान जी को अपनी शक्तियों का स्मरण हो पाया था | 

हनुमान और श्री राम का मिलन

जब माता सीता के हरण के बाद श्री राम लक्ष्मण के साथ ऋष्यमूक पर्वत पर पहुंचते हैं तो सुग्रीव हनुमान को उनकी पहचान के लिए उनके पास भेजा था | इस प्रकार हनुमान और श्री राम का मिलान हुआ था |

श्री राम के मिलन के उपरांत हनुमान ने लंका जाकर माता सीता का पता लगाया था और लंका को जलाकर राख कर दिया था | श्री राम जब रावण का वध करके वापिस अयोध्या लौटे तब हनुमान जी ने अयोध्या में रह कर श्री राम और माता सीता की सेवा की | हनुमान जी की सेवा से प्रसन्न होकर माता सीता ने हनुमान जी को चिरंजीवी का वरदान दिया |

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