श्री हनुमान चालीसा

  • Updated: Nov 13 2023 06:32 PM
श्री हनुमान चालीसा

|| श्री हनुमान चालीसा ||

दोहा॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि

बरनउँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार

 

श्री गुरु भगवान के चरणों की राज को अपने मस्तक पर धारण करके और इसी पवित्र भावना से अपने मन के दर्पण को पवित्र करते हुए प्रभु श्री राम के पवित्र यश का वर्णन करता हूँ जो मनुष्य को चारों फल (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष) को प्रदान करने वाला है | हे हनुमान - मैं निर्बुद्धि (बुद्धिहीन) आपको सुमिरन करता हूँ| मुझे आप ऐसा आशीर्वाद दें जिससे मैं शारीरिक बल, बुद्धि और विद्या को प्राप्त कर सकूँ और आप मेरे दुःख और दोषों को नाश करके मुझे कृतार्थ करें |

 

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर

राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा

श्री हनुमान आपकी जय हो आप गुणों के सागर हैं | हे कपिश्वर आपकी कीर्ति तीनों लोकों में व्याप्त है | आप श्री राम के दूत हैं, आप अतुलनीय बल को धारण करते हैं | आप माता अंजनी के पुत्र हैं और पवन सुत आपका नाम हैं |

 

महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी

कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुण्डल कुँचित केसा

हे महावीर आप विशेष पराक्रम वाले हैं | आप दूषित बुद्धि का निवारण करके अपने भक्तों की बुद्धि को सतसंगति में लगाते हैं और अच्छी बुद्धि वालों का संग देते हैं | आपका रूप और रंग कंचन (सोने) के समान है, कानों में कुण्डल, घुंघराले बाल और सुन्दर वस्त्रों से सुशोभित है |

 

 

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेउ साजै

शंकर स्वयं/सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जगवंदन

आपके हाथों में गदा रुपी बज्र है, एक हाथ में ध्वज धारण किये हुए हैं | आपके कन्धे पर सूती जनेऊ सजता हैं | आप स्वयं शंकर भगवान के अंश और केसरी जी के पुत्र हैं | आपका यश और पराक्रम सारे जगत में वंदनीय है |

 

बिद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया

आप विद्या निधान हैं आप गुणों के धनि है और अत्यंत कुशल हैं | श्री राम के कार्यों को करने में सर्वदा अग्रसर हैं | आपको श्री राम के चरित्र को सुनकर आनंद रस आता है | श्री राम माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ आपके ह्रदय में बसे हुए हैं

 

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा

भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे

आपने अति सूक्ष्म रूप धारण करके माता सीता को दिखाया था और विकराल रूप धारण करके लंका को जलाया था | आपने अति बलशाली रूप धरके असुरों एयर राक्षसों का संघार किया था और श्री राम की कार्यों को पूर्ण किया था |

 

लाय सजीवन लखन जियाए । श्री रघुबीर हरषि उर लाये

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई

आप संजीवन बूटी लेकर आये थे जिससे भ्राता लक्ष्मण को जीवन मिला और श्री राम इन सबसे आती प्रशन्न हुए थे और अपने ह्रदय से लगाया | श्री राम आपकी बहुत प्रशंसा की और आपको भारत से समान अपना प्रिय भ्राता माना |

 

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा

तुम्हारा यश का बखान हजारों मुखों से भी नहीं कर सकते ऐसा कहते हुए श्री राम चंद्र प्रभु आपको अपने लगे से लगाते हैं | सनकादिक ऋषि (सनक, सनातन, सनन्दन और सनत्वकुमार), आदि ब्रह्मा जी और नारद मुनि, सरस्वती और शेशनाग भी आपका यश गाते हैं |

 

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना । राम मिलाय राज पद दीह्ना

यमराज, कुबेर और सभी दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान और पंडित भी आपके गुणों को नहीं कह सकते | आपने सुग्रीव को श्री राम से मिलाया और उन्हें राजपद दिलाकर उनपर परम उपकार किया |

 

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना । लंकेश्वर भए सब जग जाना

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु । लील्यो ताहि मधुर फल जानू

तुम्हारे बताये मन्त्रों (उपदेशों) को विभीषण ने माना और वो लंका के राजा हुए जिन्हें सारा जगत जनता है | आपने सूर्य जो पृथ्वी से एक युग (12000 वर्ष) और सहस्त्र (1000 वर्ष) और योजन (8 मील) जितनी दूरी पर है उसे एक मीठा फल समझ कर मुख में ले लिया था |

 

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं

दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते

आप श्री राम जी की अंगूठी को मुँह में रख कर पूरे समुन्द्र को लांघ कर (माता सीता को ढूढ़ने के लिए) लंका तक गए | आपके इस पराक्रम पर किसी को संदेह नहीं था | संसार में जितने भी कठिन कार्य हैं वो आपकी कृपा मात्र से सहज ही पूर्ण हो जाते हैं

 

राम दुआरे तुम रखवारे । होत आज्ञा बिनु पैसारे

सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना

आप श्री राम रक् पहुंचने के लिए प्रथम द्वार हैं आपकी कृपा के बिना श्री राम को नहीं पा सकते | आपकी शरण में आने वाले को सभी सुख प्राप्त होते हैं, जिसकी रक्षा आप स्वयं करते हैं उन्हें किसी भी प्रकार का दर नहीं रहता |

 

आपन तेज सम्हारो आपै तीनों लोक हाँक तै काँपै

भूत पिशाच निकट नहिं आवै महावीर जब नाम सुनावै

आपके सिवा आपके तेज को कोई भी नहीं संभाल सकता, तीनों लोक आपकी गर्जना से काँप उठते हैं | भूत पिशाच आदि व्याधा आपके नाम मात्र से दूर भाग जाती हैं | आपका नाम सुमिरन से भूत और पिशाच निकट भी नहीं सकते |

 

नासै रोग हरै सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा

संकट तै हनुमान छुडावै मन क्रम बचन ध्यान जो लावै

हे श्री हनुमत जी आपका नाम जप करने से सभी रोग और पीड़ा से मुक्ति मिलती है और जो आपका नाम मन से, अपने विचारों में और अपने कर्म में निरंतर जपते रहते हैं उन्हें किसी भी प्रकार का संकट नहीं छु सकता |

 

सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा

और मनोरथ जो कोई लावै सोई अमित जीवन फल पावै

श्री राम प्रभु एक तपस्वी राजा हैं जो सर्वोपरि हैं जिनके काम तुम बड़ी ही सहजता से सफल कर देते हैं | और जो आपकी कृपा पा जाता हैं उसे जीवन में ऐसे फल की प्राप्ति होती है जिसका कोई अंत नहीं है |

 

चारों जुग परताप तुम्हारा है परसिद्ध जगत उजियारा

साधु सन्त के तुम रखवारे असुर निकंदन राम दुलारे

चारों युगों में तुम्हारा प्रताप विद्धमान है, सारे जगत में आपकी कीर्ति प्रकाशित है और तुम्हारा यश सर्वत्र फैला हुआ है | आप साधू और संतों के रखवाले हैं, आप असुरों का नाश करने वाले राम जी के परम प्रिय हैं |

 

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता

राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा

माता सीता जी के वरदान से आपके आशीर्वाद से आपके भक्त अष्ट सिद्धियों और नौ निधियों को प्राप्त कर सकते हैं | आप राम नाम की औषधि लिए हुए हैं, हे हनुमान आप सदा श्री राम के दास बने रहें |

 

तुम्हरे भजन राम को पावै जनम जनम के दुख बिसरावै

अंतकाल रघुवरपुर जाई जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई

आपके भजन करने से श्री राम  प्राप्त होती है जिससे जन्म जन्मों के दुखों से दूर हो जाते हैं | आपका भजन करने वाले अंत समय में श्री राम के धाम को जाते हैं और दोबारा जन्म लेने पर भी श्री राम के भक्त बनते है |

 

और देवता चित्त ना धरई हनुमत सेइ सर्ब सुख करई

संकट कटै मिटै सब पीरा जो सुमिरै हनुमत बलबीरा

हनुमान जी को ध्याने वालों को अन्य किसी देवता की आवश्यकता ही नहीं पड़ती हनुमान जी ही उनको सभी सुख प्रदान कर देते हैं | श्री बलबीर हनुमान जी का सुमिरन करने वालों के सभी संकट मिट जाते हैं और सभी पीड़ाओं से मुक्त हो जाते हैं |

 

जै जै जै हनुमान गोसाईं कृपा करहु गुरुदेव की नाईं

जो सत बार पाठ कर कोई छूटहि बंदि महा सुख होई

हे वीर हनुमान आपकी जय हो, जय हो आपकी सदा ही जय हो, आप हम पर गुरु देव की भांति कृपा करें | जो हनुमान जी पाठ सौ बार करता है वो निश्चय ही सभी बंधनों से मुक्त होकर महा सुख को प्राप्त करता है |

 

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा होय सिद्धि साखी गौरीसा

तुलसीदास सदा हरि चेरा कीजै नाथ हृदय मह डेरा

जो भगवान महादेव द्वारा लिखाई इस चालीसा को पढ़ते हैं उन्हें निसंदेह सफलता मिलती है और सिद्धियां प्राप्त होती है | हे वीर हनुमान तुलसीदास भी श्री हरि (श्री राम) का ही दास है, कृपा करके आप सदा मेरे ह्रदय में निवास करते रहे |

दोहा

पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप

 हे पवन पुत्र संकटों को हरने वाले, सभी आनंद और मंगल को करने वाले हैं | हे देवराज , आप श्री राम माता सीता और भ्राता लखन के साथ सदा मेरे ह्रदय में निवास करते रहे |