सप्तपुरी

  • Updated: Sep 26 2023 07:40 PM
सप्तपुरी

सप्तपुरी का अर्थ है सात पुरी | सात पुरी का मतलब सात पुराने शहर, हिन्दू धर्म में सात सबसे प्राचीन नगरों को सप्तपुरी की मान्यता दी गयी है | जिनका धार्मिक और वैज्ञानिक और आध्यत्मिक दृष्टि से बहुत ही महत्त्व है | हिन्दू धर्म में इन्हे मोक्षदायिनी कहा गया है |

अयोध्या मथुरा माया काशी काञ्ची अवन्तिका

पुरी द्वारावती चैव सप्तैता मोक्षदायिकाः॥

अयोध्या, मथुरा, माया (हरिद्वार), काशी, काञ्चीपुरम, अवन्तिका (उज्जैन), द्वारिकापुरी, ये सात मोक्षदायी (पुरियाँ) हैं।)

 

यही हिंदुओं के लिए सात सबसे पवित्र शहर हैं। इन सात पवित्र शहरों को सप्त मोक्ष पुरी या सप्त तीर्थ, 'तीर्थ के सात स्थान' भी कहा जाता है।

1. अयोध्या

अयोध्या उत्तर प्रदेश में स्थित है | अयोध्या भारत और विश्व के प्राचीनतम नगरों में से एक है | हिन्दू धर्म में इसका बाहर महत्त्व है | अयोध्या भगवान श्री राम की जन्मभूमि है  जिससे ये स्पष्ट पता चलता है के अयोध्या का इतिहास कितना पुराना है |

अयोध्या में रघुवंशियों, सूर्यवंशियों का राज्य रहा है | अयोध्या को कौशल राज्य के नाम से भी पुकारा जाता था | अयोध्या सरयू नदी के तट पर मनु द्वारा बसाई गयी थी | रामचरित मानस में अयोध्या की सम्पन्नता का वर्णन बहुत ही सुन्दर ढंग से किया गया है | यहाँ  रामजन्मभूमि , कनक भवन , हनुमानगढ़ी ,राजद्वार मंदिर ,दशरथमहल , लक्ष्मणकिला , कालेराम मन्दिर , मणिपर्वत , श्रीराम की पैड़ी , नागेश्वरनाथ , क्षीरेश्वरनाथ श्री अनादि पञ्चमुखी महादेव मन्दिर , गुप्तार घाट समेत अनेक मन्दिर हैं। बिरला मन्दिर , श्रीमणिरामदास जी की छावनी , श्रीरामवल्लभाकुञ्ज , श्रीलक्ष्मणकिला , श्रीसियारामकिला , उदासीन आश्रम रानोपाली तथा हनुमान बाग जैसे अनेक आश्रम भी आक्रषण के केंद्र हैं |

2. मथुरा

मथुरा उत्तर प्रदेश राज्य में एक बहुत ही सुन्दर नगर है | मथुरा का अस्तित्व 7500 वर्ष पुराना है | मथुरा में ही द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण रूप में अवतार लिया था | मथुरा का वर्णन वाल्मीकि रामायण में मधुपुर के नाम से किया गया है जहाँ मधुदानव रहता था और उसी के द्वारा यमुना नदी के किनारे मथुरा नगरी बसाई गयी थी | जिसको उस समय मधुपुरी कहा जाता था |

मथुरा ही श्री कृष्ण की जन्म भूमि है | मथुरा का धार्मिक और आध्यात्मिक तौर पर बहुत ही महत्त्व है | मथुरा में श्री कृष्ण के जन्म स्थान पर एक भव्य मंदिर बना हुआ है | मथुरा में बहुत ही धार्मिक स्थल हैं जैसे :- वृन्दावन, गोकुल, नंदगाव, बरसाना और बलदेव और भी अन्य |

मथुरा में इन सभी नगर की अलग अलग परिक्रमा लगाई जाती है | गोवेर्धन नमक एक क़स्बा है जहाँ हनुमान जी द्वारा मेरु पर्वत को रखा गया था जो द्वापर में गोवेर्धन पर्वत  के नाम से जाना गया | श्री कृष्ण के बड़े भ्राता बलदेव जी का मंदिर भी मथुरा में बलदेव नामक कस्बे में हैं | मथुरा के मंदिरों की सुंदरता श्रद्धालुओं और पर्यटन की दृष्टि से देखते ही बनते है |

3. हरिद्वार

हरिद्वार उत्तराखण्ड राज्य में एक बहुत प्राचीन तीर्थ है जो अब बहुत ही पवित्र नगर भी बन चूका है | हरिद्वार का अर्थ है हरी का द्वार | गंगा नदी पहाड़ी क्षेत्रों से पौराणिक काल में इसे माया के नाम से जाना जाता था और यहाँ पर कपिल मुनि का तपोवन था तो कपिला के नाम से प्रसिद्ध था |

गंगा नदी को भगीरथ ने तपस्या करके धरती पर बुलाया था तभी से इस तीर्थ की मान्यता है | समुंद्र मंथन के बाद जब धनवंतरि जी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे और राक्षस जब कलश को पाना चाहते थे तब अमृत कलश से कुछ बुँदे पृथ्वी पर गिरी थी | जहाँ जहाँ ये बुँदे गिरी थी हरिद्वार भी उन्हीं जगहों में से एक है | जहाँ अमृत की बुँदे गिरी थी वो जगह हर की पौड़ी पर ब्रह्म कुंड के नाम से प्रसिद्ध है | हर की पौड़ी को हरिद्वार का सबसे पवित्र घाट मानते है जो भी यहाँ स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है, हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है |

हरिद्वार में महाकुम्भ का आयोजन भी होता है | महाकुम्भ में लाखों की संख्या में श्रद्धालु दुनिया भर से आते है और पूरे रीति रिवाज से और श्रद्धा से शास्त्रविधि पूर्वक स्नान करते हैं | हरिद्वार में गंगा आरती बहुत ही प्रसिद्ध है और संध्या आरती की वैभवता बहुत ही सुन्दर होती है |

हरिद्वार में अनेक धार्मिक स्थल है जैसे हर की पौड़ी, चण्डी देवी मंदिर, मनसा देवी मंदिर, माया देवी, वैष्णो देवी और भारत माता मंदिर और भी अन्य |

4. काशी (वाराणसी/बनारस)

काशी जो अब वर्तमान में वाराणसी के नाम से जानी जाती है | काशी नगरी पौराणिक काल से है | वाराणसी का नाम दो नदी वरुणा और असी के संगम से बना है | काशी का इतिहास उतना ही पुराना है जितना की पुराण | काशी की उत्त्पति के बारें में अलग अलग मान्यताएं है | काशी के विद्वानों का मानना है के काशी शिव की उपासना का सबसे प्राचीन केंद्र है | एक मान्यता ये भी है के काशी पहले भगवान विष्णु की पूरी थी और भगवान शिव ने जब ब्रह्मा जी का पांचवा सर काटा था था तो इसी तीर्थ में ब्रह्म हत्या से मुक्त हुए थे | तब से महादेव काशी में आवास करने लगे | काशी को बसाने वाले राजा काश थे जिससे इस नगरी का नाम काशी पड़ा |

काशी के बारे में एक और धारणा है के काशी नगरी का कभी अंत नहीं हो सकता | प्रलय के समय काशी नगरी को महादेव अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते है | काशी धार्मिक मान्यता के साथ साथ आध्यात्म का भी केंद्र है और नौवीं शताब्दी में शंकराचार्य ने विद्याप्रचार के लिए काशी को महत्वपूर्ण केंद्र बनाया था |

काशी को सभी भौतिक बंधनों से मुक्त मानते है | काशी को मोक्षदायिनी और भगवान शिव की राजधानी कहते है | हिन्दू धर्म में मान्यता है के काशी में प्राण त्यागने वालों को सीधा मोक्ष मिलता है | काशी में भगवान शिव के विश्वनाथ रूप की पूजा होती है जिसका अर्थ है पूरे विश्व के नाथ | काशी के और भी प्रचलित नाम हैं - काशी, वाराणसी, महाश्मशान, रुद्रावास, काशिका, मुक्तिभूमि, शिवपुरी, त्रिपुरारिराजनगरीऔर विश्वनाथनगरी |

काशी के मंदिर और घाट बहुत ही सुन्दर और मनोरम है | काशी के मुख्य मंदिर हैं - विश्वनाथ मन्दिर, अन्नपूर्णा मन्दिर, काल भैरव मन्दिर, तुलसी मानस मन्दिर, संकटमोचन मन्दिर, दुर्गा मन्दिर | काशी के मुख्य घाट हैं - असीसंगम घाट, दशाश्वमेघ घाट, मणिकर्णिका घाट, पंचगंगा घाट, हनुमान घाट, मानसरोवर और केदार घाट |

5. कांचीपुरम

कांचीपुरम तमिलनाडु राज्य में एक जिला है और जिले का मुख्य नगर है | कांची पलर नदी के किनारे बसा हुआ एक सुन्दर शहर है | कांची का अर्थ ब्रह्म की पूजा और पुरम का अर्थ होता है शहर, मतलब ब्रह्म को पूजने वाला शहर | एक मान्यता है के ब्रह्मा जी ने देवी के दर्शन के लिए यहाँ तप किया था |

कांचीपुरम पूरी दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक हैऔर इसे मंदिरों के स्वर्ण शहर के रूप में भी जानते हैं | यह तमिलनाडु का मुख्य नगर है जो अपने सुंदर मंदिरों के साथ और आध्यात्मिकता के कारण विश्व प्रसिद्ध है और ये अपने स्थापत्य वैभव के लिए प्रचलित हैं। इसे वाराणसी के बाद दूसरा सबसे पवित्र शहर माना जाता है, और हजारों श्रद्धालु इस शहर में आकर एकांत और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं।

कांची की सुंदरता का वर्णन करते हुए महाकवि कालिदास जी ने लिखा है

"पुष्पेशु जाति, पुरुषेशु विष्णु, नारीशु रम्भा, नगरेशु कांची"

अर्थात जैसे पुष्प में पारिजात, पुरुषों में विष्णु भगवान, नारियों में जो रम्भा की सुंदरता है वही नगरों में कांची की है |

कांची में बहुत से महत्वपूर्ण पर्यटक स्थल है जैसे :- एकाम्बरनाथ मन्दिर, कामाक्षी अम्मन मन्दिर, कैलाशनाथ मन्दिर, बैकुंठ पेरुमल मंदिर और अन्य |

6. उज्जैन

उज्जैन मध्य प्रदेश राज्य का एक प्रमुख और बहुत प्राचीन शहर जो शिप्रा नदी के किनारे पर बसा हुआ है | उज्जैन को पूर्वकाल में अवंतिका, उज्जैयनी के नाम से भी जाना जाता था | उज्जैन नगरी का इतिहास बहुत ही पुराना है | भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकाल ज्योतिर्लिंग यहीं स्थित है | महाकाल जिसका मतलब है के जिसकी काल (मृत्यु) पर भी विजय है | इसलिए यहाँ आने वाले भक्तों को मृत्यु का भय नहीं रहता और मोक्ष को प्राप्त करते हैं |

उज्जैन का सम्बद्ध सीधे शिव है तो उज्जैन की स्थापना की गणना तो बहुत मुश्किल है | द्वापर युग में श्री कृष्ण और बलराम जी ने अवंतिका में ही संदीपन ऋषि से शिक्षा प्राप्त की थी | श्री कृष्ण की 8 पत्नियों में से एक मित्रवृन्दा भी उज्जैन की ही राजकुमारी थी | मित्रवृन्दा के दो भाइयों ने महाभारत युद्ध में कौरवों का साथ दिया था और वीर गति प्राप्त किया था | महाकवि कालिदास की जन्मभूमि भी उज्जैन को ही बताया जाता है | ऐसी मान्यता उनकी रचनाओं में उज्जैन के प्रति प्रेम को देखकर है |

उज्जैन में बहुत ही सुन्दर मंदिर और तीर्थ स्थल हैं जैसे: - चिन्तामन गणेश, स्थिरमन गणेश, कालभैरव देव, महाकालेश्वर महादेव, सिद्धनाथ वट मंगलनाथ देव अंगारेश्वर महादेव, अक्रुरेश्वर महादेव, मार्कंद्देशवर महादेव, चारधाम मन्दिर, वैभवलक्ष्मी मन्दिर हनुमतेश्वर मन्दिर, संदीपनी आश्रम, हनुमान मन्दिर और भी अन्य |

7. द्वारिका

द्वारिका भगवान विष्णु के द्वापर अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है | द्वारकाधीश मंदिर द्वारका गुजरात के द्वारका जिले में स्थित एक नगर तथा हिन्दू तीर्थस्थल है। यह हिन्दुओं के साथ चार धामों में से एक है। यह सात पुरियों में एक पुरी है। यह श्रीकृष्ण की कर्मभूमि है। गुजरात का द्वारका शहर वह स्थान है जहां आज से 5000 वर्ष पूर्व कृष्ण भगवान ने मथुरा छोड़ने के बाद अपनी नगरी बसाई थी।

द्वारका भगवान श्री कृष्ण के कहने पर देव शिल्पी विश्वकर्मा ने बसाई थी | जब जरासंध मथुरा पे बार बार आक्रमण करता था तो भगवान श्री कृष्ण अपनी प्रजा को बचाने लिए द्वारका आकर बस गए थे | द्वारका में विष्णु भगवान के द्वारकाधीश मंदिर के साथ साथ और भी मंदिर हैं | जैसे रुक्मणि मंदिर, रणछोड़ जी का मंदिर, हनुमान मंदिर और राधा, सत्यभामा, जामवंती और भी मंदिर हैं 

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विक्रम संवत् 2081