नन्द उपनन्द और वृषभानु

  • Updated: Jan 09 2024 02:34 PM
नन्द उपनन्द और वृषभानु

नन्द, उपनन्द और वृषभानु

 

हम सभी लोग श्री कृष्ण के ब्रज धाम से भलीं भांति परिचित हैं। सब नन्द और वृषभानु के बारे में सिर्फ इतना ही जानते हैं के नन्द बाबा श्री कृष्ण के पिता थे और वृषभानु जी श्री राधा जी के पिता हैं। परन्तु ये सिर्फ नाम मात्र नहीं अपितु ये उपाधि होती हैं।

गर्ग संहिता के अनुसार स्वयं भगवान ब्रह्म जी श्री कृष्ण से इनके लक्षणों के बारे में पूछते हैं और तब श्री कृष्ण ने स्वयं अपने मुख से उन्हें बताया के - जो लोग गौशाला में गायों की सेवा किया करते हैं और जिनकी जीविका गौ सेवा ही है उन्हें गोपाल कहते हैं और गोपालों के साथ नौ लाख गायों के स्वामी को नन्द कहते हैं और पांच लाख गायों के स्वामी को उपनन्द कहते हैं। वृषभानु उन्हें कहते हैं जिनके पास दस लाख गायों का स्वामित्व होता है और जिनके यहाँ एक करोड़ गायों की रक्षा होती है उन्हें नन्दराज कहते हैं। पचास लाख गायों के स्वामित्व को वृषभानुवर की संज्ञा दी गयी है।

गौलोकधाम में द्रोण और सुचन्द्र नाम के दो वसु थे जो द्वापर में ब्रजमंडल में नन्द और वृषभानु के रूप में जन्मे थे।

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