द्वारका भारत के पश्चिम में गुजरात राज्य के देवभूमि द्वारका ज़िले में स्थित एक प्राचीन नगर है। द्वारका गोमती नदी और अरब सागर के किनारे ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी तट पर बसा हुआ है। द्वारिका भगवान विष्णु के द्वापर अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है | द्वारकाधीश मंदिर द्वारका गुजरात के द्वारका जिले में स्थित एक नगर तथा हिन्दू तीर्थस्थल है। यह हिन्दुओं के साथ चार धामों में से एक है। यह सात पुरियों में एक पुरी है। यह श्रीकृष्ण की कर्मभूमि है। गुजरात का द्वारका शहर वह स्थान है जहाँ श्री कृष्ण भगवान लगभग 5000 वर्ष पूर्व मथुरा छोड़कर अपना एक अलग नगर बसाया था |
द्वारका भगवान श्री कृष्ण के कहने पर देव शिल्पी विश्वकर्मा ने बसाई थी | जब जरासंध मथुरा पे बार बार आक्रमण करता था तो भगवान श्री कृष्ण अपनी प्रजा को बचाने लिए द्वारका आकर बस गए थे | द्वारका में विष्णु भगवान के द्वारकाधीश मंदिर के साथ साथ और भी मंदिर हैं | जैसे रुक्मणि मंदिर, रणछोड़ जी का मंदिर, हनुमान मंदिर और राधा, सत्यभामा, जामवंती और भी मंदिर हैं |
विवरण
द्वारका एक अति-महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल है। धुनिक द्वारका एक शहर है। कस्बे के एक हिस्से के चारों ओर चहारदीवारी खिंची है इसके भीतर ही सारे बड़े-बड़े मन्दिर है। बीतें कई वर्षों से बहुत ही विख्यात शोधकर्ताओं ने पुराणों में दर्शाई गयी द्वारिका के रहस्यों को जानने के लिए प्रयत्न किये हैं, परन्तु वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार अभी तक किसी भी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाए हैं | द्वारिका के रहस्यों को समझने के लिए सन 2005 से भारतीय नौसेना की मदद से अभियान शुरू किया था | अभियान के दौरान समुन्द्र की गहराई में बहुत से कटे-छटे पत्थर और अन्य 200 से अधिक नमूने निकाले हैं, लेकिन ये अभी तक तय नहीं हो पाया है ये कृष्ण जी द्वारा बसाई गयी द्वारिका ही है |
श्रीकृष्ण मथुरा में उत्पन्न हुए, पर राज उन्होने द्वारका में किया। यहीं बैठकर उन्होने सारे देश की बागडोर अपने हाथ में संभाली। पांड़वों को सहारा दिया। धर्म की जीत कराई और, शिशुपाल और दुर्योधन जैसे अधर्मी राजाओं को मिटाया। द्वारका उस जमाने में राजधानी बन गई थीं। इस जगह का धार्मिक महत्व तो है ही, रहस्य भी कम नहीं है। महाभारत के युद्ध के पश्चात गान्धारी ने श्री कृष्ण को श्राप दिया था जिसके परिणाम स्वरुप द्वारिका समुन्द्र में डूब गयी थी, कहा जाता है के समुन्द्र में उसी के अवशेष हैं जिनका अध्धयन किया जा रहा है |
मठ: शारदा मठ | बीज मंत्र: तत्वमसि | वेदः सामवेद | सन्यासी नाम : सरस्वती, तीर्थ, आश्रम | प्रथम मठाधीशः हस्तमालक (पृथ्वीधर) | दिशा: पश्चिम | सहायक शिव मंदिर: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग | कुंभ : उज्जैन