अयोध्या

  • Updated: Sep 28 2023 11:58 AM
अयोध्या

अयोध्या उत्तर प्रदेश राज्य में एक धार्मिक नगर और तीर्थ है जो ऐतिहासिक और राजनितिक दृष्टि से भी बहुत ही महत्वपूर्ण है | ये सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है | रामचरितमानस में तुलसीदास जी ने सरयू नदी और अयोध्या के बारे में लिखा है के - "श्रीसरयूजीका दर्शन, स्पर्श, स्नान और जलपान पापोंको हरता है। यह नदी पड़ी ही पवित्र है, इसकी महिमा का कोई अंत नहीं है, जिसे श्री सरस्वती जी के मुख से भी नहीं कहा जा सकता |" और अयोध्या का वर्णन करते हुए लिखा है

"बंदउँ अवध पुरी अति पावनि सरजू सरि कलि कलुष नसावनि 

प्रनवउँ पुर नर नारि बहोरी ममता जिन्ह पर प्रभुहि थोरी 

मैं अति पवित्र श्रीअयोध्यापुरी और कलियुगके पापोंका नाश करनेवाली श्रीसरयू नदीकी वन्दना करता हूँ। फिर अवधपुरीके उन नर-नारियोंको प्रणाम करता हूँ जिनपर प्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी ममता थोड़ी नहीं है (अर्थात् बहुत है"

इसलिए अयोध्या का सप्तपुरी में और भारत के महत्वपूर्ण तीर्थ में मोक्षदायिनी के रूप में पूजा जाता है |

स्थापना और नाम

मान्यता है के अयोध्या को मनु ने बसाया था और एक मान्यता ये भी है के मनु के पुत्र इक्ष्वाकु ने अयोध्या को बसाया था | इक्ष्वाकु कौशल देश के राजा था और साकेत उसकी राजधानी थी जो अयोध्या का ही पूर्व नाम है |

वेदों में अयोध्या को ईश्वर का नगर बताया जाता है | अयोध्या का अर्थ है युद्धा (जिसको युद्ध में जीता जा सके) | अयोध्या की सुंदरता के समक्ष स्वर्ग को भी काम बताया जाता था |

धार्मिक महत्व

अयोध्या को विश्व के प्राचीन और पहली मानव सभ्यता का गौरव भी प्राप्त है | अयोध्या प्रभु श्री राम की जन्मभूमि है और इसी कारण हिंदी धर्म में ये स्थल पूजनीय है | लंका विजय के बाद श्री राम ने अयोध्या में राज किया था और सरयू नदी के घाट पर ही उन्होंने मानव शरीर त्याग कर अपने लोक को प्रस्थान किया था |

मुख्य स्थान

1. श्री राम जन्म भूमि - नगर के पश्चिम में रामकोट जगह अयोध्या का सबसे प्रमुख स्थल श्री राम जन्म भूमि है जहाँ चारों भाइयों के राम, लक्ष्मण भरत और शत्रुघ्न के बाल स्वरुप के दर्शन होते हैं | हर साल राम नवमी का पर्व यहाँ पर बहुत धूम धाम से मनाया जाता है |

2. हनुमान गढ़ी

ये जगह अयोध्या नगर के मध्य में है | अयोध्या राम की नगरी है और जहाँ राम हैं वहां हनुमान भी जरूर होंगे | इसलिए अयोध्या में भगवान राम के दर्शन से पहले श्रद्धालु हनुमान जी के दर्शन करते हैं। यहां हनुमान मंदिर "हनुमानगढ़ी" के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि हनुमान जी यहाँ एक गुफा में रहते थे और रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते थे।

एक कथा प्रचलित है के सुल्तान मंसूर अली अवध का नवाब उसका एकमात्र पुत्र गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। जान बचने के आसार नहीं दिख रहे थे तो सुल्तान ने थक हार कर संकटमोचक हनुमान जी के चरणों में माथा रख दिया। हनुमान ने अपने आराध्य प्रभु श्रीराम का ध्यान किया और सुल्तान के पुत्र की हालत में सुधर होने लगा। अपने पुत्र की प्राण रक्षा के बाद अवध के नवाब मंसूर अली ने खुद को बजरंगबली  में समर्पित कर दिया | जिसके बाद नवाब ने केवल हनुमान गढ़ी मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया और ये घोषणा की कि कभी भी इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं रहेगा और ही यहां से कोई कर वसूल किया जाएगा। उसने 52 बीघा भूमि हनुमान गढ़ी इमली वन के लिए दान की | श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में आने से उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

3. नागेश्वर नाथ मंदिर

भगवन शिव को समर्पित नागेश्वर नाथ मंदिर श्री राम के पुत्र कुछ ने बनवाया था | एक बार जब कुश सरयू नदी में स्नान कर रहे थे तब उनका बाजु बंद खो गया था जो एक नाग कन्या को मिल और कुश ने उसके लिए ये मंदिर बनवाया था | नाग कन्या एक शिव भक्तनी थी | यहाँ पर शिवरात्रि बड़ी ही धूम धाम से मनाई जाती है |

4. श्रीअनादि पञ्चमुखी महादेव मन्दिर

अयोध्या में गोप्रतार घाट पर पञ्चमुखी शिव का मंदिर स्थित है जिसे अनादि माना जाता है। भगवन शिव वर्णित ईशान, तत्पुरुष, वामदेव, सद्योजात और अघोर नामक पाँच मुखों वाले लिंगस्वरूप का पूजन करने से भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।

5. राघवजी का मन्दिर

ये मन्दिर अयोध्या नगर के केन्द्र में स्थित बहुत ही प्राचीन भगवान श्री रामजी का स्थान है जिसे राघवजी का मंदिर नाम से भी जानते है मन्दिर में स्थित भगवान राघवजी अकेले ही विराजमान है ये मात्र एक ऐसा मंदिर है जिसमे श्री राम जी के साथ माता सीताजी की मूर्ति बिराजमान नहीं है। सरयू नदी में स्नान के बाद प्रभु श्री राम के राघव रूप दर्शन करने चाहिए |

6. सप्तहरि

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जी की लीला के अतिरिक्त अयोध्या में श्रीहरि ने अन्य सात रूप में भी प्राकट्य हुये हैं इन्हीं रूपों को सप्तहरि के नाम से पुकारा जाता है। अलग-अलग समय देवताओं और मुनियों की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रकट हुये भगवान् विष्णु के सात स्वरूपों को ही सप्तहरि के नाम से जाना जाता है। इनके नाम भगवान "गुप्तहरि", "विष्णुहरि", "चक्रहरि", "पुण्यहरि", "चन्द्रहरि", "धर्महरि" और "बिल्वहरि" हैं।

विद्वानों की साधना और मुख्य पर्व

अयोध्या श्री राम की नगरी होने के साथ साथ अनेक संतो की साधना के भी केंद्र रही है | यहाँ विधमान अनेक आश्रम संतो के ही बसाये हुए हैं | जैसे स्वामी श्रीरामचरणदास जी महाराज 'करुणासिन्धु जी' स्वामी श्रीरामप्रसादाचार्य जी, स्वामी श्रीयुगलानन्यशरण जी, पं. श्रीरामवल्लभाशरण जी महाराज, श्रीमणिरामदास जी महाराज, स्वामी श्रीरघुनाथ दास जी, पं.श्रीजानकीवरशरण जी |

अयोध्या में श्री राम नवमी, श्री जानकीनवमी, गुरुपूर्णिमा और श्री राम विवाहोत्सव  आयोजन बहुत ही बड़ी धूम धाम से किया जाता है |

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