भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

  • Updated: Sep 26 2023 07:19 PM
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग

भीमाशंकर मंदिर भोरगिरि महाराष्ट्र के पुणे में गांव खेड़ से 50 कि.मि.दूर स्थित है। यह पश्चिमी घाट के सह्याद्रि पर्वत पर स्थित है। भगवान शिव का प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है। इस ज्योतिर्लिंग की मोटाई बहुत होने के कारण ही इसे मोटेश्वर के नाम से भी पूजा जाता है | इसी मंदिर के पास से भीमा नामक एक नदी भी बहती है जिसका विलय कृष्णा नदी में होता है | जो भक्त श्रद्धा पूर्वक सुबह १२ ज्योतिर्लिंग का जाप करते हुए इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते हैं उनको सात जन्म के पाप से मुक्ति होती है स्वर्ग के द्वार खुल जाते हैं |

पौराणिक कथा के अनुसार, सह्याद्री पर्वत की श्रेणियों पर जंगलों में भीम नाम का एक असुर (राक्षस) अपनी मां कर्कटी के साथ रहता था। वह वास्तव में राजा रावण के छोटे भाई कुम्भकर्ण का पुत्र था जिसे कुम्भकरण ने बल पूर्वक पैदा किया था। कर्कटी का पति विराध था जिसे श्री राम ने मारा था और कुम्भकरण का वध भी श्री राम ने ही किया था जब भीमा को ये सब पता चला तो उसने बदला लेने की कसम खाई और भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न करने और वरदान पाने के लिए घोर तपस्या की।

उसकी तपस्या से खुश होकर ब्रह्मा ने उसे अपार शक्ति का आशीर्वाद दिया, जिसका उपयोग वह दुनिया को आतंकित करने के लिए करता था। उन्होंने भगवान शिव के एक उत्साही भक्त राजा सुदक्षिण को कैद कर लिया | सुदक्षिण ने कारागार में ही पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया और महादेव की भक्ति करने लगा | भीम को जब पता लगा तो वो सुदक्षिण के पास आया और शिवलिंग को नष्ट करने के लिए अपनी तलवार उठाई। तभी भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और उन्हें भस्म कर दिया। भगवान शंकर की कृपा से सुदक्षिण को मुक्ति मिली और उसको अपना राज्य भी वापिस मिल गया | महादेव के भीमाशंकर स्वरुप के दर्शन के लिए देवता भी प्रकट हुए | उस समय देवताओं और ऋषियों ने भगवान शंकर की स्तुति की और कहा &ndash &ldquoप्रभो आप यहाँ सुरक्षा देने के लिए सदा निवास करें। आप भीमशंकर के नाम से विख्यात होंगे और सबके मनोरथों को सिद्ध करेंगे। आपका यह ज्योतिर्लिंग सदा पूजनीय और समस्त विपत्तियों का निवारण करने वाला होगा।"

महादेव भक्ति भाव के वसीभूत होकर वहीँ पर ज्योतिर्लिंग स्वरुप स्थिर हो गए जिसे भीमाशंकर के नाम से पूजा जाता है |

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