ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

  • Updated: Sep 26 2023 07:16 PM
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग तृतीय ज्योतिर्लिंग है जो मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले में उपस्थित है | ये नर्मदा नदी में मान्धाता नामक ॐ के आकार द्वीप पर स्थित है | यह जगह अपनी भव्यता और इतिहास से प्रसिद्ध है। यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह के आकार में बना है। यहां दो मंदिर स्थित हैं 1. ओम्कारेश्वर और 2. ममलेश्वर |

राजा मान्धाता जो बड़े शिव भक्त थे उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दर्शन दिए थे और राजा ने शिव को यहीं निवास करने के लिए वरदान मांग लिया | तभी से ये प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकार-मान्धाता के रूप में पुकारी जाने लगी। जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ, वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है। इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 कोटि देवता परिवार सहित निवास करते हैं।

एक अन्य किंवदंती और है कि विंध्य पर्वत ने विंध्य को अपना निवास बनाने के लिए घोर तपस्या करते हुए भगवान शिव से प्रार्थना की। उस समय के विद्वानों का कहना है के यह मेरु पर्वत से भी ऊँचा होना था क्यूंकि उस समय मेरु पर्वत की शाखाएं देवलोक तक जाती थी | और ये सब नारद मुनि ने विंध्य को उसका अंहकार तोड़ने के लिए बताया था | उसकी तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए और वहां एक ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर उनकी इच्छा पूरी की। देवताओं और संतों के कहने पर, भगवान शिव ने लिंग को दो भागों में विभाजित किया - एक ओंकारेश्वर में और दूसरा अमरेश्वर या ममलेश्वर में। इसलिए भक्त जब मांधाता के दर्शन करते हैं तो इन दोनों मंदिरों के दर्शन करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव के आशीर्वाद से विंध्य ने अपने आप को बढ़ने दिया और समय के साथ, विंध्य पर्वत की विशालता ने भक्तों के लिए समस्याएँ पैदा कीं और इसलिए उन्होंने ऋषि अगस्त्य की मदद मांगी। ऋषि ने पहाड़ को तब तक बढ़ने से रोकने का आदेश दिया जब तक कि वे वापस नहीं जाते, जो उन्होंने कभी नहीं किया, और इसलिए उसने भक्तों की समस्या का समाधान किया।

मान्धाता में ही ऑकारेश्वर की दो परिक्रमाएँ होती हैं - एक छोटी और एक बड़ी। ऑकारेश्वर की यात्रा तीन दिन की मानी जाती है। इस तीन दिन की यात्रा में यहाँ के सभी तीर्थ जाते हैं।

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