सोमनाथ ज्योतिर्लिंग
सोमनाथ मन्दिर भारत के पश्चिम में गुजरात प्रदेश के सौराष्ट्र में वेरावल में स्थित है। सोमनाथ को 12 ज्योतिर्लिंग में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है | सोमनाथ का अर्थ है सोम के नाथ और चन्द्रमा को ही सोम कहा जाता है अतः चन्द्रमा ने शिवलिंग का निर्माण कर शिव की आराधना की और जब शिव ने ज्योतिरूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिए तब सोमनाथ को ज्योतिर्लिंग की मान्यता मिली |सोमनाथ तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती के त्रिवेणी महासंगम पर स्थित है |
हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार चन्द्रमा अर्थात सोम का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 पुत्रियों को साथ हुआ था | सोम उनमें से रुक्मणी को सबसे अधिक प्यार किया करता था और सबसे अधिक समय उसी के साथ बिताता था | जब इस सबका पता प्रजापति दक्ष को लगा तब उन्होंने क्रोध में आकर सोम को श्राप दे दिया के उसका तेज हर रोज क्षीण होता रहेगा | इसके परिणाम स्वरुप चन्द्रमा का तेज हर दिन काम होने लगा | तब इस श्राप से मुक्ति के लिए सोम ने महादेव की आराधना आरम्भ कर दी तब उसकी आराधना से खुश होकर महादेव स्वयं प्रकट हुए और उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया | महादेव ने स्वयं को शिवलिंग में स्थापित कर सोमनाथ (सोम के नाथ) ज्योतिर्लिंग की स्थापना की |
ये मंदिर न सिर्फ हिन्दू धर्म बल्कि भारत की अखंडता का और पुनर्निर्माण सोच का भी प्रतिनिधित्व करता है | महमूद गजनवी ने सन 1024 में कुछ 5,000 साथियों के साथ सोमनाथ मन्दिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। मंदिर में स्थित मूल शिवलिंग को खंडित किया गया था | इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। इससे पहले भी इस मंदिर का तीन बार पुनर्निर्माण किया जा चूका था | सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे उस समय के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल ने इसका निर्माण कराया था और दिसंबर 1955 में भारत के राष्ट्रपति डॉ० राजेन्द्र प्रसाद द्वारा राष्ट्र को समर्पित करा दिया |

मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग विराजमान है जहाँ ट्रस्ट द्वारा अधिकृत पुजारी और मुख्य लोगों के अलावा सभी का प्रवेश वर्जित है | मन्दिर के प्रांगण में हनुमानजी का मन्दिर, पर्दी विनायक, नवदुर्गा खोडीयार, अहिल्येश्वर, अन्नपूर्णा, गणपति और काशी विश्वनाथ के मन्दिर हैं। विरला क्षेत्र में सोमनाथ मंदिर के साथ साथ और भी बहुत मंदिर हैं जैसे अघोरेश्वर मन्दिर, भैरवेश्वर मन्दिर, महाकाली मन्दिर, दुखहरण जी की जल समाधि, पंचमुखी महादेव मन्दिर इत्यादि | नागरों के इष्टदेव हाटकेश्वर मंदिर, देवी हिंगलाज का मन्दिर, कालिका मन्दिर, बालाजी मन्दिर, नरसिंह मन्दिर, नागनाथ मन्दिर समेत कुल 42 मन्दिर नगर के लगभग दस किलो मीटर क्षेत्र में स्थापित हैं।
विक्रम संवत् 2083
🐅 शुक्रवार, 8 मई 2026