त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग

  • Updated: Sep 26 2023 07:25 PM
त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग

त्र्यम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग मन्दिर महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्रयंबक गांव में निकटवर्ती ब्रह्म गिरि नामक पर्वत पर स्थित है | ब्रह्मगिरि पर्वत ही गोदावरी नदी का उद्गम स्थान है। गोदावरी नदी को दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है | पौराणिक कथा के अनुसार गोदावरी भाई माँ गंगा का ही रूप है | गौतम ऋषि तथा गोदावरी के प्रार्थनानुसार भगवान शिव ने यहाँ निवास करने की कृपा की और इस प्रकार त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थापत्य हुआ।

मान्यतानुसार त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की विशेषता यह है के ये शिवलिंग अर्घाकार है अर्थात ये शिवलिंग ऊपर की तरफ उठा हुआ होकर अंदर की तरफ दसा हुआ है और शिवलिंग में तीनो देव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के प्रतीकात्मक तीन छोटे छोटे शिवलिंग विद्द्मान है | 

एक बार महर्षि गौतम के तपोवन में रहने वाले ब्राह्मणों की पत्नियाँ उनकी पत्नी अहिल्या से नाराज हो गईं। उन्होंने अपने पतियों को ऋषि गौतम का अपमान करने के लिए प्रेरित किया। उन ब्राह्मणों ने इस उद्देश्य पूर्ती के लिए भगवान्&zwnj श्रीगणेशजी की आराधना की। उनकी आराधना से प्रसन्न हो गणेशजी ने प्रकट होकर उनसे वर माँगने को कहा उन ब्राह्मणों ने कहा- "हे प्रभु यदि आप आराधना से प्रसन्न है तो ऐसा वर दें के ऋषि गौतम इस आश्रम का त्याग करके यहाँ से चले जाएँ |" गणपति जी उन्हें ऐसा वर मांगने के लिए कहा | किंतु वे अपने उद्देश्य पूर्ति पर अटल रहे। गणेशजी को अपने वरदान को पूरा करने के लिए वे एक दुर्बल गाय का रूप धारण करके वहीँ खेतों में जाकर रहने लगे। गाय को फसल चरते देखकर ऋषि बड़ी नरमी के साथ हाथ में तृण लेकर उसे हाँकने के लिए लपके। उन तृणों का स्पर्श होते ही वह गाय वहीं मरकर गिर पड़ी। अब तो बड़ा हाहाकार मचा।

सारे ब्राह्मण इकट्ठे होकर गो-हत्यारा कहकर ऋषि गौतम को भला बूरा कहने लगे। ऋषि गौतम को इस घटना से बहुत दुःख हुआ | और उन्हें भी लगा के उन्हें पश्चाताप करना चाहिए | अब उन सारे ब्राह्मणों ने कहा कि तुम्हें यह आश्रम छोड़ना होगा और कहीं दूर चले जाना चाहिए। गो-हत्यारे के निकट रहने से हमें भी पाप लगेगा। विवश होकर ऋषि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या के साथ वहाँ से एक कोस दूर जाकर रहने लगे। मगर ब्राह्मणों ने उनका वहां रहना भी दुर्भर कर दिया और उन्हें तंग करने लगे और वेदपाठ इत्यादि कर्मो को करने से भी रोकने लगे | अत्यंत अनुनय भाव से ऋषि गौतम ने उन ब्राह्मणों से प्रार्थना की कि आप लोग मेरे प्रायश्चित और उद्धार का कोई उपाय बताएँ।

तब उन्होंने कहा- 'गौतम तुम्हे पृथ्वी की तीन बार परिक्रमा करनी होगी और परिक्रमा करते हुए अपने पाप को सर्वत्र बताना भी होगा, तदुपरांत वापिस इसी स्थान पर एक मास तक व्रत करते हुए नियम का पालन करो | इसके बाद 'ब्रह्मगिरी' की 101 परिक्रमा करने के बाद तुम्हारी शुद्धि होगी अथवा यहाँ गंगाजी को लाकर उनके जल से स्नान करके एक करोड़ पार्थिव शिवलिंगों से शिवजी की आराधना करो। इसके बाद पुनः गंगाजी में स्नान करके इस ब्रह्मगिरि पर्वत की 11 बार परिक्रमा करके सौ घड़ो में पवित्र जल भरके शिवलिंग को नहलाने से तुम्हारा उद्धार अवश्य होगा |

जैसा ब्राह्मणों ने कहा महर्षि गौतम ने वे सारे कार्य अपनी पत्नी के साथ पूर्णतः तल्लीन होकर भगवान शिव की आराधना की और इससे प्रसन्न हो भगवान शिव ने प्रकट होकर उनसे वर माँगने को कहा। महर्षि गौतम ने उनसे कहा- 'भगवान्‌ मैं यही चाहता हूँ कि आप मुझे गो-हत्या के पाप से मुक्त कर दें।' भगवान्शिव ने कहा- 'गौतम! तुम पाप मुक्त हो | जिन ब्राह्मणों ने तुम पर छल से गौ हत्या का आरोप लगाया था मैं उन्हें दंड देना चाहता हूँ |'

इस पर महर्षि गौतम ने कहा कि प्रभु उन्हीं के निमित्त से तो मुझे आपका दर्शन प्राप्त हुआ है। अब उन्हें मेरा परमहित समझकर उन पर आप क्रोध करें।' बहुत से ऋषियों, मुनियों और देव गणों ने वहाँ एकत्र हो गौतम की बात का अनुमोदन करते हुए भगवान शिव से सदा वहाँ निवास करने की प्रार्थना की। वे उनकी बात मानकर वहाँ त्र्यम्बक ज्योतिर्लिंग के नाम से स्थित हो गए। गौतमजी द्वारा लाई गई गंगाजी भी वहाँ पास में गोदावरी नाम से प्रवाहित होने लगीं। यह ज्योतिर्लिंग समस्त पुण्यों को प्रदान करने वाला है।

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