विश्वेश्वर (विश्वनाथ) ज्योतिर्लिंग

  • Updated: Sep 26 2023 07:21 PM
विश्वेश्वर (विश्वनाथ) ज्योतिर्लिंग

काशी में विश्वनाथ मंदिर सबसे महत्वपूर्ण है | विश्वनाथ शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर कई हजार वर्षों से वाराणसी में स्थित है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में बड़ा उच्च स्&zwjथान है। ऐसी मान्यता है के जो एक बार इस मंदिर के दर्शन करता है और पवित्र गंगा में स्&zwjनान करता है उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। आदि शंकराचार्य, सन्त एकनाथ, गोस्&zwjवामी तुलसीदास जी भी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए आते थे ।

मान्यता है कि यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती का आदि स्थान है। जब देवी पार्वती अपने पिता के घर रह रही थीं जहां उन्हें बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था, देवी पार्वती ने एक दिन भगवान शिव से उन्हें अपने घर ले जाने के लिए कहा तब भगवान शिव ने देवी पार्वती की बात मानकर उन्हें काशी लेकर आए और यहां विश्वनाथ-ज्योतिर्लिंग के रूप में खुद को स्थापित कर लिया |

ज्योतिर्लिंग एक चांदी की वेदी पर गर्भगृह के केंद्र में है। विष्णु, विनायक, कालभैरव और सनेश्वर जैसे अन्य देवताओं के मंदिर भी हैं मंदिर के अंदर एक कुआं है, जिसे ज्ञान कूप या ज्ञान वापी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जब मुगल मंदिर को नष्ट करने के लिए आए थे तो लिंग को यहीं पर छिपा दिया गया था |

इसे 1194 ई. में कुतुब-उद-दीन-ऐबक द्वारा और फिर 1669 में मुग़ल सम्राट, औरंगज़ेब सहित सदियों से अन्य आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया, जिन्होंने इसके स्थान पर एक मस्जिद का निर्माण किया। इसे मुगल बादशाह अकबर के सेनापति, राजा मान सिंह और उनके वित्त मंत्री, राजा टोडर मल सहित विभिन्न शासकों द्वारा फिर से बनवाया गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने सन् 1780 में करवाया था। बाद में महाराजा रणजीत सिंह द्वारा 1853 में 1000 कि.ग्रा शुद्ध सोना दान करके मंदिर में लगवाया था।

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