एकादशी क्या है?
संस्कृत में एकादशी का अर्थ होता है दस और एक यानि ग्यारह अर्थात ग्यारहवां दिन | हिन्दू कालगणना में एक मास यानि एक महीने में दो पक्ष होते हैं एक होता है शुक्ल पक्ष जिसमे चन्द्रमा पूर्णिमा की तरफ बढ़ता है और कृष्ण पक्ष जब चन्द्रमा पूर्णिमा से अमावस्या की और बढ़ता है |
एकादशी कौन थी?
पूर्वकाल में एक मूर नामक का राक्षस था अत्यन्त शक्तिशाली और पराक्रमी भी था | उसने देवताओं से स्वर्ग लोक जीत लिया था और उन्हें स्वर्ग से वंचित कर दिया था | देवताओं के स्थान पर उसने अपने की लोगों को उनके सिंघासन पर बिठा दिया था | इंद्र और सभी देव भगवान विष्णु के पास गए और उनसे विनती करने लगे | इंद्र और देवताओं की बात सुनकर भगवान विष्णु को क्रोध आ गया और उस राक्षस से युद्ध करने के लिए चन्द्रावती नगरी पहुंचे जिसे मूर ने ही बसाया था | भगवान विष्णु और मूर में कई दिनों तक युद्ध चलता रहा | विष्णु भगवान बद्रिकाश्रम चले गए जहाँ सिंहावती नाम की गुफा थी | भगवान विष्णु उसी गुफा में आराम करने लगे | मूर राक्षस भगवान विष्णु का पीछा करते हुए उस गुफा में आ गया और उन्हें सोते हुए देख कर उन्हें मारने के लिए आगे बढ़ा | तभी भगवान विष्णु से एक कन्या प्रकट हुयी और जो अत्यंत रूपवती, सौभग्यशाली और दिव्य अस्त्रों से सुसज्जित थी | उस कन्या और मूर में युद्ध हुआ जिसके परिणाम स्वरुप मूर राक्षस मारा गया | 
जब भगवान विष्णु निद्रा से जाग गए तब उन्होंने पुछा के इस राक्षस को किसने मारा तब उस कन्या ने जवाब दिया के "प्रभु आपके ही प्रभाव से मैंने इस राक्षस का अंत किया है|"
भगवान विष्णु ने कहा के " हे कल्याणी तुमने देवताओं के लिए बहुत ही मंगल कार्य किया है जिससे तीनों लोकों में और देवताओं में हर्ष है | अतः तुम कोई भी वरदान मांगो मैं उसे पूरा करूँगा |"
कन्या ने श्री भगवान से कहा "यदि आप मुझ पर प्रशन्न हैं तो मुझे ऐसा वर दें के मैं सब तीर्थों में प्रधान, सब सिद्धियां देने वाली और सभी विघ्नों का नाश करने वाली होऊं | जो लोग आपकी भक्ति करते हुए मेरा उपवास करें तो उन्हें धन, धर्म और मोक्ष की प्राप्ति हो |" विष्णु भगवान ने वरदान देते हुए कहाँ के जैसा तुम चाहती हो ऐसा ही हो | इस प्रकार एकादशी महाव्रत प्रारम्भ हुआ | दोनों पक्ष की एकादशी समान फलदायी हैं इनमें भेद नहीं करना चाहिए |
वर्ष में आने वाली एकादशी की सूची इस प्रकार है |
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क्रमांक |
वैदिक मास |
पालक देवता |
शुक्लपक्ष एकादशी |
कृष्णपक्ष एकादशी |
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1 |
चैत्र (मार्च-अप्रैल) |
विष्णु |
कामदा |
वरूथिनी |
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2 |
वैशाख (अप्रैल-मई) |
मधुसूदन |
मोहिनी |
अपरा |
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3 |
ज्येष्ठ (मई-जून) |
त्रिविक्रम |
निर्जला |
योगिनी |
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4 |
आषाढ़ (जून-जुलाई) |
वामन |
देवशयनी |
कामिका |
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5 |
श्रावण (जुलाई-अगस्त) |
श्रीधर |
पुत्रदा |
अजा |
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6 |
भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) |
हृशीकेश |
परिवर्तिनी |
इंदिरा |
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7 |
आश्विन (सितंबर-अक्टूबर) |
पद्मनाभ |
पापांकुशा |
रमा |
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8 |
कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर) |
दामोदर |
प्रबोधिनी |
उत्पन्ना |
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9 |
मार्गशीर्ष (नवंबर-दिसम्बर) |
केशव |
मोक्षदा |
सफला |
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10 |
पौष (दिसम्बर-जनवरी) |
नारायण |
पुत्रदा |
षटतिला |
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11 |
माघ (जनवरी-फरवरी) |
माधव |
जया |
विजया |
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12 |
फाल्गुन (फरवरी-मार्च) |
गोविंद |
आमलकी |
पापमोचिनी |
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13 |
अधिक (3 वर्ष में एक बार) |
पुरुषोत्तम |
पद्मिनी |
परमा |
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
एकादशी के व्रत का सिर्फ धार्मिक लाभ ही नहीं अपितु आध्यात्मिक लाभ के साथ साथ हमारे शरीर में वैज्ञानिक लाभ भी है |
विक्रम संवत् 2083
वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती
जलियाँवाला बाग स्मृति-दिवस
🔱 सोमवार, 13 अप्रैल 2026