संकटी गणेश चतुर्थी

  • Updated: Aug 22 2023 07:25 PM
संकटी गणेश चतुर्थी

संकटी गणेश चतुर्थी

हिन्दू पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी तिथियाँ होती है,एक शुक्ल पक्ष की अमावस्या के बाद एवं एक कृष्णा पक्ष की पूर्णिमा को। गणेश जी को विघ्न हर्ता एवं संकट मोचन के नाम से जाना जाता है। इस दिन गणेश जी की उपासना की जाती है। 

पूजन विधि:

सर्वप्रथम सुबह उठकर स्नान करे और साफ वस्त्र पहनें। फिर गणेश जी की मूर्ति को साफ करके लाल कपडे बिछे हुए चौकी पर विराजित करे। फिर अक्षत ,जल एवं पंचामृत से गणेश जी का पूजन करें। गणेश जी को दूर्वा, फूलमालाएं अर्पित करें। ऐसा करने से गणेश जी की कृपा होती है और घर में रिद्धि सिद्धि आती हैं।

गणेश चतुर्थी का महत्तव:

गणेश जी विघ्नो का नाश करने वाले हैं। मनुष्य के सभी संकट हर लेते हैं। गणेश जी को रिद्धि सिद्धि के देवता भी कहा जाता है। ऐसा मन जाता है जो भी मनुष्य इस व्रत को  पूरी श्रद्धा से

करता है उसकी सभी मनोकामना पूरी होती है। और सारे कष्ट दूर हो जाते है।  उसका घर धनधान्य से भर जाता है।

गणेश चतुर्थी व्रत कथा:

एक बार भगवन शंकर ने अपने दोनों पुत्रों कार्तिकेय तथा गणेश जी से पूछा तुममें से कौन ऐसा वीर है, जो देवताओ की रखा कर सके। तब कार्तिकेय ने अपने को देवताओ का सेनापति प्रमाणित करते हुए देव रक्षा योग्य अधिकारी बताया। इसके बाद भगवन शंकर ने गणेश जी से पूछा। तब गणेश जी ने कहा मैं तो बिना सेनापति बने ही देवताओ के संकट हर सकता हूँ। शिव जी दोनों बालको की परीक्षा लेने हेतु बोले, दोनों मैं से जो पृथ्वी की परिक्रमा सबसे पहले करके मेरे पास जायेगा ,वही वीर सर्वश्रेष्ठ घोषित किया जाएगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर चढ़कर पृथवी की परिक्रमा करने चल पड़े। गणेश जी ने सोचा ,अपने वाहन पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करने में बहुत समय लग जाएगा। इसलिए कोई और युक्ति सोचनी चाहिए। गणेश जी ने अपने माता पिता की सात बार परिक्रमा की और कार्तिकेय के आने की प्रतीक्षा करने लगे। कार्तिकेय ने लौटने पर अपने पिता से कहा की गणेश जी पृथ्वी की परिक्रमा करने गए ही नहीं। इस पर गणेश जी बोले मैंने अपने माता पिता की सात बार परिक्रमा की है। माता पिता में ही समस्त तीर्थ निहित है ,इसलिए मैंने पृथवी की परिक्रमा पूरी कर ली है। गणेश जी की युक्ति सुनकर सब देवता और कार्तिकेय ने उनकी बात सर झुकाकर स्वीकार कर ली। तब शंकर जी ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया की समस्त देवताओ में सर्वप्रथम तुम्हारी पूजा होगी। गणेश जी ने पिता की आज्ञा अनुसार देवताओ का संकट दूर किया। यह शुभ समाचार जानकर भगवन शंकर जी ने कहा की चतुर्थी तिथि के दिन चन्द्रमा तुम्हारे मस्तक पर ताज बनकर पूरे विश्व को शीतलता प्रदान किया करेगा। जो भी इस व्रत को करेगा उसके समस्त पाप धूल जायेंगे और वह सारे सुखो को भोगेगा।

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