चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को कामदा एकादशी कहते हैं | ये परम पुण्यदायिनी होती है |
एक सोने के महलों से बना हुआ बहुत ही सुन्दर नगर हुआ करता था जिसका नाम था नागपुर और वहां पर पुण्डरीक और वैसे ही भयंकर नाग नाग रहा करते थे | पुण्डरीक नाग वहां का राजा था । गन्धवर्, किन्नर और अप्सराएँ भी उस नगर में निवास किया करते थे | वहाँ एक ललिता नाम की सुन्दर अप्सरा थी। उसका ललित नाम का पति था और दोनों ही परस्पर काम से पीड़ित रहा करते थे । ललिता के ह्रदय में हमेशा ललित का ही ध्यान रहता था |
एक बार की बात है राजा पुण्डरीक के दरबार में ललित गन्धर्व का गान हो रहा था परन्तु ललिता उस समय उसके साथ नहीं थी | अचानक उसे ललिता का स्मरण हुआ और उसकी जीभ लड़खड़ा गयी और उसने गाना रोक दिया | उस दरबार में एक कर्कोटक नाम का श्रेष्ठ नाग था जिसे ललित के मन की व्यथा का पता चल गया और उसने राजा को सब बता दिया | सब सुनकर राजा को क्रोध आ गया और उसने ललित को श्राप दे दिया के "-तू राज दरबार में भी गाना गाते हुए अपनी पत्नी के वशीभूत है जा राक्षस होजा"|
राजा के इतना कहने पर ललित राक्षस रूप में हो गया | उसके रूप इतना विकराल था के देखने मात्र से भय होने लगे | ललित वन में घूमते हुए अपने कर्मों का फल भोगने   लगा | ललिता भी अपने पति के पीछे पीछे वन में घूमने लगी | वन में घूमते हुए उसे एक आश्रम दिखाई दिया जहाँ एक मुनि बड़ी शांत अवस्था में बैठे हुए थे | ललिता मुनि के पास गयी और उन्हें प्रणाम किया | मुनि ने ललिता से कहा - "हे शुभे तुम कौन हो और यहाँ किस कारण आयी हो, मुझे सब सच सच बताओ"|
ललिता ने मुनि से कहा -"महात्मा मैं वीरधन्वा नामक गन्धर्व की पुत्री ललिता हूँ | मेरे पति अपने दोष के कारण राक्षस हो गए हैं और मैं उनको इस अवस्था में देख कर मुझे चैन नहीं होता | आप मेरा कर्तव्य मुझे बताएं और जिस पुण्य के द्वारा मेरे पति का उद्धार हो वो मुझसे कहे |"
तब ऋषि ने कहा के -"आज चैत्र मास की कामदा एकादशी है जो सब पाप को हरने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली है | तुम इस व्रत का विधिपूर्वक पालन करो और इसके द्वारा मिलने वाले पुण्य को अपने पति को दो | इस प्रकार तुम्हारे पति का उद्धार संभव है"| मुनि के वचन सुन कर ललिता बहुत खुश हुयी और सच्चे मन से और नियम का पालन करते हुए अपना व्रत पूरा किया | व्रत पूर्ण होने के अगले दिन आश्रम में भगवान विष्णु से अपने पति के उद्धार के लिए विनम्रता से कहा -"हे ईश्वर यदि मैंने कामदा एकादशी के व्रत का विधिवत पालन किया है तो और उसके पुण्य के प्रभाव से मेरे पति राक्षस योनि से मुक्त मिले और वो पुनः गन्धर्व हो जाये "| ललिता के इतना कहने पर ललित राक्षस योनि से मुक्त होकर पहले की तरह रूपवान हो गया और दोनों पत्नी पत्नी अत्यंत शोभा पाने लगे |
इन सबको ध्यान में रखकर कामदा एकादशी के व्रत का पालन करना चाहिए | &lsquoकामदा एकादशी&rsquo ब्रह्म हत्या आदि पापों तथा पिशाचत्व आदि दोषों का नाश करनेवाली है ।
ॐ नमो नारायण
विक्रम संवत् 2083
वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती
जलियाँवाला बाग स्मृति-दिवस
🔱 सोमवार, 13 अप्रैल 2026