वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी जो मनुष्यों के पाप हरने वाली और तिथियों में उत्तम है | ऐसी मान्यता है के इस व्रत का पालन करने वाले मनुष्य मोहजाल से मुक्ति पा जाते हैं |
त्रेता युग में एक बार श्री राम जी ने गुरु वशिष्ठ से पुछा - हे गुरुवर ऐसे व्रत के बारे में सुनना चाहता हूँ जो मनुष्यों को मोहजाल से मुक्ति दिलाये, उनके दुखों को दूर करे और व्रतों में उत्तम हो |
गुरु वशिष्ठ ने उन्हें कहा - हे राम | यूँ तो तुम्हारे नाम के स्मरण मात्र से मनुष्यों के कष्ट दूर हो जाते हैं फिर भी मैं तुम्हे ऐसे व्रत के बारें में बताता हूँ जो जन कल्याण के हित में हो | तब उन्होंने बताया के वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे मोहिनी एकादशी कहते हैं वह मनुष्यों के सब पाप और दुखों को हरने वाली है |
उसकी कथा इस प्रकार है | एक भद्रावती नाम की सुन्दर नगरी सरस्वती नदी के किनारे पर स्थित है | वहां पर चन्द्रवंशीय धृतिमान नामक बड़े ही सत्यप्रतिज्ञ राजा राज्य करते थे | उनके राज्य में एक धनपाल नाम का व्यापारी था, जो बहुत ही धनवान और समृद्धशाली था | धनपाल बहुत ही पुण्यकर्मी था जो जन साधारण के लिए पीने के पानी के प्याऊ, कुएं और उनके लिए घर भी बनवाता था | धनपाल भगवान विष्णु का परम भक्त था और उसके पांच पुत्र थे | उनके नाम क्रमशः सुमना, द्युतिमान, मेधावी, सुकृत और पांचवा था धृष्टबुद्धि | पांचवा पुत्र बड़ा ही धूर्त था और हमेशा व्यसन और पापों में संलग्न रहता था | हमेशा पर स्री का वास करता था और वेश्याओं के पास जाकर पिता का धन बर्बाद करता था | एक बार उसके पिता ने उसे वेश्या के साथ बाजार में देख लिया और उसे घर से निकल दिया |
घर से निकाले जाने के बाद भूख और प्यास से व्याकुल होकर दर दर भटकने लगा | इस तरह भटकते भटकते वो महर्षि कौण्डिल्य के आश्रम जा पंहुचा | अब तक उसका मन शोक से ग्रस्त हो चूका था और मन ग्लानि का भी भाव आ चूका था | उसने महर्षि से बड़े ही विनम्र होकर पुछा -"हे ब्राह्मण श्रेष्ठ मुझ पर दया करते हुए और आशीर्वाद देते हुए मेरे पाप मुक्ति के लिए कोई व्रत बताएं जिसका पालन करते हुए मैं अपने पापों से मुक्त होकर सदगति को प्राप्त करूँ |"
कौण्डिल्य ऋषि बोले -"वैशाख में शुक्ल पक्ष में मोहिनी एकादशी होती है उसका व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पहाड़ जैसे पाप भी नष्ट हो जाते हैं | तुम्हे इस व्रत का पालन करना चाहिए | इससे तुम्हारा उद्धार संभव है |"
धृष्टबुद्धि ने मोहिनी एकादशी व्रत को नियमानुसार रखा और उसका पालन किया | जिसके फल स्वरुप उसके सभी पाप नष्ट हो गए और वो अपनी देह का त्याग कर श्री विष्णुधाम को प्रस्थान कर गया |
इस प्रकार मोहिनी एकादशी व्रत का पालन करते हुए श्री विष्णु भगवान की भक्ति करनी चाहिए और प्रभु नाम का जाप करना चाहिए |
ॐ नमो नारायणा |
विक्रम संवत् 2083
वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती
जलियाँवाला बाग स्मृति-दिवस
🔱 सोमवार, 13 अप्रैल 2026