आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को योगिनी एकादशी या शयनी एकादशी कहते हैं |
एक बार की बात है धर्मराज युधिष्ठिर कहने लगे कि भगवन, मैंने आषाढ़ शुक्ल एकादशी के व्रत का माहात्म्य सुना। अब कृपया आषाढ़ कृष्ण एकादशी की कथा सुनाइए। इसका नाम क्या है? माहात्म्य क्या है? यह भी बताइए।
श्रीकृष्ण कहने लगे कि हे राजन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम योगिनी है। यह तीनों लोकों में प्रसिद्ध है। मैं तुमसे पुराणों में वर्णन की हुई कथा कहता हूँ। ध्यानपूर्वक सुनो।
स्वर्गधाम में एक सुंदर नगरी थी जिसका नाम अलकापुरी था | उसका राजा कुबेर था जो एक बड़ा शिव भक्त था और रोज प्रातः शिव की पूजा करता था | उसकी पूजा के लिए फूल लेन वाले माली का नाम हेम था और हेम की एक पत्नी थी जिसका नाम विशालाक्षी था और वो बहुत ही सुन्दर थी | एक दिन हेम ने फूल तो तोड़ लिए लेकिन वो अपनी पत्नी के साथ कामासक्त होकर उसके साथ विनोद करने लगा और राजा की पूजा के लिए पुष्प ले जाना भूल गया | दोपहर तक राजा रह देखता रहा परन्तु माली नहीं पंहुचा | राजा ने अपने सेवकों को कहा के पता  करो माली क्यों नहीं आया | सेवकों ने राजा को साडी बात बताई के वो अतिकामी पापी अपनी पत्नी के साथ रमण करता रह गया होगा | फिर राजा ने क्रोध में आकर उसे लाने के लिए कहा |
माली राजा के क्रोध से बहुत भयभीत हो गया और राजा के सामने उपस्थित हुआ | राजा ने क्रोध में आकर उसे कहा -"हे नीच और कामी तूने कामयुक्त महेश्वर महादेव का अनादर किया है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूँ के तू मृत्यु लोक में कोढ़ से ग्रस्त रहेगा और हमेशा अपनी स्त्री का वियोग सहेगा"|
कुबेर के श्राप से हेम माली स्वर्ग से सीधा पृथ्वी लोक पर आ गया | पृथ्वी पर आते ही उसको श्वेत कोढ़ लग गया और स्वर्ग में उसकी पत्नी भी अंतर्ध्यान हो गयी | पृथ्वी पर आकर वो दुःख भोगने लगा और वो जंगलों में बिना अन्न जल भटकने लगा | स्वर्ग में महादेव की पूजा के प्रभाव से उसे अपने पिछले कर्म याद थे | वन में भटकते भटकते हेम मार्केण्डय ऋषि के आश्रम में पहुंच गया, उनका आश्रम ब्रह्मा जी की सभा के सामान ही शोभायमान थी | हेम मार्कण्डेय ऋषि के पैरों में गिर गया | उसे देखकर मार्कण्डेय ऋषि ने उससे कहा - तुमने ऐसा कौन सा पाप किया है जिसके कारण तुम्हारी ये स्थिति है | माली ने ऋषि को सारा वृतांत क्रमवार सुनाया |
सब सुनकर ऋषि बोले - "तुमने सारा वृतांत सत्य कहा है इसलिए तुम्हारे उद्धार के लिए एक व्रत बताता हूँ | तुम  आषाढ़मास की कृष्ण पक्ष के एकादशी का व्रत विधिवत करोगे तो तुम सब पापों से मुक्त हो जाओगे"|
ऋषि के वचनों को सुनकर हेम ने अत्यंत हर्ष के साथ उनको साष्टांग प्रणाम किया और माली ने मुनि के कथनानुसार विधिपूर्वक योगिनी एकादशी का व्रत किया। इस व्रत सम्पूर्ण होने के बाद उसके प्रभाव से माली अपने पुराने स्वरूप में आकर वह अपनी पत्नी के साथ सुखपूर्वक रहने लगा।
भगवान कृष्ण ने कहा- हे राजन यह व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल देता है। इसके व्रत से समस्त पाप दूर हो जाते हैं और अंत में स्वर्ग प्राप्त होता है।
ॐ नमोः नारायणा
विक्रम संवत् 2083
वरुथिनी एकादशी, वल्लभाचार्य जयंती
जलियाँवाला बाग स्मृति-दिवस
🔱 सोमवार, 13 अप्रैल 2026